Wednesday, 20 January 2016

बहुत दिनों बाद.

बहुत दिनों बाद
बैठी हूँ आज अपने कोने में 
सांसें लेती स्थिरता से आज 
बहुत दिनों बाद ;
वो देखो! उड़ता हुआ एक एरोप्लेन 
चला जा रहा अपनी ही धुन में ,
वो देखो! नन्हा सा एक बदल घुल सा गया है 
स्याह से अनंत आसमां की चादर में ;
जगमगाते से घर , महकती सी सन्नाटे की खुशबू 
हवा में फिसलते कुछ मीठे से बोल 
प्रकृति की घनी छाँव में
मधुर यादें पिरोती आज
बहुत दिनों बाद ;
 चलना गर जीवन है 
तो ठहराव इसका सम्बल 
पाँव जो थक जाएं यूँ ही
रुकना ना भूल जाना कभी ;
बैठना इक पल को ही सही
दिल से मुस्कुरा लेने को 
इतना ही काफी है मेरे दोस्त!
चाहे हो बहुत दिनों बाद।

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